चाँद की रौशनी मे ये कौन जगमगाया है ,
देखो मैंने भी अपना एक नया आशयाना बनाया है
दिन छिपने पे पंछी खोज लेते है अपना बसेरा जिस तरह ,
मैंने भी एक कदम उस तरह बढाया है
अपने विचारो को गीतों का रूप दे देता है, कवि जिस तरह ,
मैंने भी हार मे एक नया मोती उस तरह पिरोया है
देखो मैंने भी अपना एक नया आशयाना बनाया है
देखो मैंने भी अपना एक नया आशयाना बनाया है
दिन छिपने पे पंछी खोज लेते है अपना बसेरा जिस तरह ,
मैंने भी एक कदम उस तरह बढाया है
अपने विचारो को गीतों का रूप दे देता है, कवि जिस तरह ,
मैंने भी हार मे एक नया मोती उस तरह पिरोया है
देखो मैंने भी अपना एक नया आशयाना बनाया है
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